रायगढ़ /पूरे देश में मानव सेवा, दानवीरता और परोपकार के लिए विख्यात रायगढ़ शहर के शिल्पी, दूरदर्शी एवं समता के भाव से परिपूर्ण महादानी सेठ किरोड़ीमल लोहारीवाला की 157वीं जयंती के अवसर पर आज सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट रायगढ़ द्वारा जूटमिल स्थित उनके समाधि स्थल पर जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहरवासियों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर उनकी 157वीं जयंती को श्रद्धा और सम्मान के साथ यादगार रूप में मनाया।
श्रद्धा-सुमन अर्पित कर किया गया नमन
15 जनवरी को सुबह 10 बजे से आयोजित कार्यक्रम में शहर के नागरिकों, समाजसेवियों एवं ट्रस्ट के सदस्यों ने सेठ किरोड़ीमल लोहारीवाला की समाधि स्थल पर श्रद्धा के दीप प्रज्ज्वलित किए और पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उनकी अर्द्धांगिनी स्वर्गीय श्रीमती अशर्फी देवी को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
मानव सेवा और दान की मिसाल थे सेठ किरोड़ीमल
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सेठ किरोड़ीमल लोहारीवाला केवल एक उद्योगपति नहीं, बल्कि मानव सेवा और सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश भाग समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के उत्थान में समर्पित कर दिया। उनके दान और सेवाभाव के कारण आज भी वे जन-जन के हृदय में जीवित हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान
सेठ किरोड़ीमल लोहारीवाला ने रायगढ़ में शिक्षा के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण दान किए। उनके सहयोग से स्कूल, कॉलेज और पुस्तकालय स्थापित हुए। सेठ किरोड़ीमल विज्ञान एवं कला महाविद्यालय तथा सेठ किरोड़ीमल पॉलिटेक्निक कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थानों के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर मिला।
स्वास्थ्य सेवा में भी रहा अतुलनीय योगदान
उन्होंने रायगढ़ में नेत्र चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दान दिया, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क अथवा सस्ती चिकित्सा उपलब्ध हो सकी। उनके प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाएं आमजन तक पहुंचीं।
धार्मिक व सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका
सेठ किरोड़ीमल लोहारीवाला ने मंदिरों, धर्मशालाओं, रैन बसेरों एवं सामाजिक भवनों के निर्माण हेतु भी उदारतापूर्वक दान किया। रायगढ़ सहित अन्य स्थानों पर बनाए गए धर्मशालाओं से यात्रियों और गरीबों को आश्रय मिला।
औद्योगिक विकास और रोजगार में योगदान
रायगढ़ की पहचान को औद्योगिक नगर के रूप में स्थापित करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। जूट मिल की स्थापना से न केवल उद्योग को बढ़ावा मिला, बल्कि सैकड़ों लोगों को रोजगार भी प्राप्त हुआ।
आज भी प्रेरणा स्रोत हैं सेठ किरोड़ीमल
कार्यक्रम के समापन पर वक्ताओं ने कहा कि सेठ किरोड़ीमल लोहारीवाला का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका दान, सेवा और समानता का भाव समाज को सही दिशा दिखाता है। जयंती कार्यक्रम के माध्यम से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प भी लिया गया।
