बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनावी विवाद में शपथ ग्रहण समारोह को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। चुनाव रद्द किए जाने के आदेश के खिलाफ अपील लंबित होने के बावजूद प्रस्तावित शपथ कार्यक्रम को लेकर क्लब सदस्यों के बीच मतभेद उभर आए हैं।
19 सितंबर 2025 को संपन्न चुनाव में आशीर्वाद पैनल के दिलीप यादव अध्यक्ष, गोपीनाथ डे उपाध्यक्ष, लोकेश्वर बाघमारे कोषाध्यक्ष और रमेश राजपूत सहसचिव निर्वाचित हुए थे, जबकि संदीप करिहार सचिव और कैलाश यादव कार्यकारिणी सदस्य चुने गए थे। चुनाव के दौरान कुछ प्रत्याशियों ने मतदाता सूची में त्रुटियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।
बाद में सहायक पंजीयक स्तर पर शिकायतों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ी और रजिस्ट्रार द्वारा 18 नवंबर 2025 को चुनाव निरस्त करने का आदेश जारी किया गया। निर्वाचित अध्यक्ष दिलीप यादव ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने मामले में शासन स्तर पर अपील का विकल्प अपनाने की हिदायत दी, जिसके बाद प्रकरण उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में विचाराधीन बताया जा रहा है।
इस बीच 26 जनवरी 2026 को प्रस्तावित शपथ समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आमंत्रित किया गया था, लेकिन संवेदनशील परिस्थिति को देखते हुए कार्यक्रम नहीं हुआ। अब 20 फरवरी को प्रस्तावित समारोह में उपमुख्यमंत्री अरुण साव के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की चर्चा ने विवाद को और हवा दे दी है।
क्लब के कई सदस्यों का मानना है कि जब अपील लंबित है, तब शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम माना जा सकता है। वहीं समर्थक पक्ष का कहना है कि निर्वाचित पदाधिकारियों को अपना दायित्व संभालने का अधिकार है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, अपील विचाराधीन होने की स्थिति में किसी भी प्रकार का औपचारिक शपथ समारोह विवाद को और जटिल बना सकता है। ऐसे में प्रशासनिक और राजनीतिक तटस्थता बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है।
फिलहाल सभी की नजर अपील पर आने वाले निर्णय और प्रस्तावित शपथ समारोह की स्थिति पर टिकी हुई है, जिससे आगे की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
