मरारपारा की जर्जर कच्ची आंगनबाड़ी बनी खतरे का घर, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ — विभागीय लापरवाही पर सवाल

कोंडागांव | छत्तीसगढ़, 26 फ़रवरी 2026 — शहर के बीचोंबीच मरारपारा क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी केंद्र किराए के जर्जर कच्चे मकान में संचालित हो रही है, जो नन्हे बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। जिला मुख्यालय अंतर्गत इस क्षेत्र में लंबे समय से दर्जनभर से अधिक बच्चे इसी असुरक्षित भवन में शिक्षा और पोषण सेवाएं लेने को मजबूर हैं। बारिश और मौसम के बदलते हालातों में यह कच्चा मकान कभी भी हादसे का कारण बन सकता है।

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केंद्र की सहायिका और कार्यकर्ता के अनुसार, इस जर्जर भवन की जानकारी संबंधित विभाग को पहले ही दी जा चुकी है, बावजूद इसके अब तक किसी भी तरह की सुरक्षा व्यवस्था या वैकल्पिक भवन की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे पालकों में गहरी चिंता बनी हुई है और वे अपने बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।

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सूत्रों के मुताबिक, आंगनबाड़ी केंद्र में पदस्थ कार्यकर्ता के कार्य को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि वे कई बार कार्य के दौरान केंद्र से अनुपस्थित रहती हैं, जिससे बच्चों को सरकार की योजनाओं के तहत मिलने वाली प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

 

स्थानीय नागरिकों और पालकों ने प्रशासन व महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई हो, ताकि नन्हे बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

 

 यह मामला केवल एक आंगनबाड़ी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है — जहां बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए।

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