छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं आस्था स्थलों में से एक है मड़वारानी माता का मंदिर, जो श्रद्धालुओं के बीच गहरी भक्ति और मान्यता का केंद्र माना जाता है। यह मंदिर कोरबा से चांपा मार्ग पर स्थित एक ऊँचे पहाड़ की चोटी पर बसा है। चारों ओर हरियाली और ऊँचाई से दिखने वाला दृश्य इस मंदिर को और भी भव्य बना देता है।
साथ में मड़वारानी माता का मंदिर आस्था, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास का प्रतीक है। यहाँ की कथा, मंदिर की भव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य मिलकर इस स्थान को अनोखा और दिव्य बनाते हैं।
मड़वारानी माता से जुड़ी किवदंती
मंदिर का नाम और इसकी प्रसिद्धि एक अद्भुत कहानी से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार माता मड़वारानी अपने शादी के मंडप (मड़वा) को छोड़कर यहाँ आ गई थीं। जब माता इस क्षेत्र से गुजर रही थीं, तो बरपाली-मड़वारानी मार्ग पर उनके शरीर से हल्दी एक विशाल पत्थर पर गिरी। कहा जाता है कि वह पत्थर तुरंत पीले रंग का हो गया और तब से यह गाँव और पर्वत मड़वारानी माता के नाम से जाना जाने लगा।
यह कथा आज भी श्रद्धालुओं के बीच आस्था और विश्वास का प्रतीक है। लोग मानते हैं कि जिस प्रकार माता ने अपने मंडप को त्यागकर इस स्थल को चुना, उसी तरह वे अपने भक्तों की पीड़ा हरकर उन्हें सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं।
आस्था का केंद्र है मां मड़वारनी
मड़वारानी माता के मंदिर में हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करने पहुँचते हैं। विशेष अवसरों, पर्व-त्योहारों और खासकर नवरात्रि के समय यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त श्रद्धा और भक्ति से माता के चरणों में नारियल, चुनरी, फूल और दीप अर्पित करते हैं।
कहा जाता है कि माता मड़वारानी के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी लोग यहाँ दर्शन करने पहुँचते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण
मंदिर की सबसे खास बात इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह मंदिर पहाड़ की चोटी पर स्थित है, जहाँ तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को चढ़ाई करनी पड़ती है। जैसे-जैसे भक्त मंदिर की ओर बढ़ते हैं, वैसे-वैसे उनकी आस्था और उत्साह भी बढ़ता जाता है। ऊँचाई से दिखने वाला नज़ारा और मंदिर परिसर का शांत वातावरण हर किसी को आध्यात्मिक अनुभव कराता है।
माना जाता है कि यहाँ ध्यान और भजन-कीर्तन करने से मन को गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
मड़वारानी में पर्व और आयोजन
हर साल नवरात्रि में मड़वारानी माता मंदिर में भव्य आयोजन होते हैं। दूर-दूर से भक्त माँ के दरबार में जुटते हैं और माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मंदिर समिति द्वारा इस दौरान सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु दिन-रात यहाँ पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
धार्मिक पर्यटन का केंद्र है मड़वारानी
मड़वारानी माता मंदिर न केवल आस्था का स्थल है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर के साथ-साथ आस-पास की प्राकृतिक खूबसूरती का भी आनंद लेते हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर यहाँ सुविधाओं का विस्तार किया जाता रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
माना जाता है कि जो भी सच्चे मन से माता मड़वारानी के दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि मड़वारानी माता मंदिर आज भी छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान और श्रद्धा का एक अमिट प्रतीक बना हुआ है।
