कोरबा। अष्टमी के पावन अवसर पर कोरबा जिले के प्रसिद्ध मां मड़वारानी मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालु दिन-रात बिना थके, 5 किलोमीटर लंबा पहाड़ी रास्ता तय कर मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। लेकिन इस अपार श्रद्धा के बीच प्रशासनिक या कहे समिति की लापरवाही ने एक बार फिर व्यवस्था की पोल खोल दी।
स्ट्रीट लाइट लगे सिर्फ दिखवा, अधेरे में डूबा रास्ता
मंदिर मार्ग में सभी जगह स्ट्रीट लाइट्स तो लगाई गई हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर बंद पड़ी नजर आ रही है। रात के अंधेरे में श्रद्धालुओं को टॉर्च और मोबाइल की रोशनी के सहारे चलना पड़ा रहा है। इस तरह की अव्यवस्था न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है, बल्कि उनकी सुरक्षा के साथ बड़ा खतरा है।
जंगली जानवरों और जहरीले कीड़ों का भी खतरा
5 किलोमीटर लंबे पहाड़ी रास्ते में जंगल से सटा हुआ इलाका है, जहां जंगली जानवरों और जहरीले सांप-बिच्छुओं का डर हमेशा बना रहता है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह यात्रा अत्यंत जोखिमपूर्ण हो जाती है।
प्रशासन और समिति पर उठे सवाल
श्रद्धालुओं का कहना है कि आयोजनों से पहले भव्य तैयारियों की बातें तो होती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही होती है। न तो पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई और न ही सुरक्षा या प्राथमिक उपचार की कोई ठोस व्यवस्था नजर आई।
आखिर इन सब के पीछे जिम्मेदार कौन,
