हसदेव नदी के पावन तट पर बसी ग्राम कनकी की पुण्यभूमि एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और आस्था के महासंगम की साक्षी बनने जा रही है। यहां विराजमान साक्षात स्वयंभू भुइँफोड़ कनकेश्वर महादेव के धाम में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पावन पर्व धूमधाम और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन से कनकेश्वर धाम में वार्षिक मेले का शुभारंभ भी होगा, जो पूरे एक सप्ताह तक चलेगा।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण, हरियाली और कल-कल बहती हसदेव नदी के बीच स्थित यह प्राचीन शिवधाम सदियों से क्षेत्रवासियों की आस्था और विश्वास का केंद्र रहा है। मान्यता है कि कनकेश्वर महादेव का शिवलिंग स्वयं धरती से प्रकट हुआ है, इसी कारण इन्हें भुइँफोड़ महादेव कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विशेष जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। तड़के सुबह से ही शिवभक्तों की भारी भीड़ कनकेश्वर धाम पहुंचने की संभावना है। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से संपूर्ण क्षेत्र शिवमय वातावरण में डूब जाएगा।
सप्ताहभर चलने वाला वार्षिक मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ग्रामीण संस्कृति, लोकपरंपराओं और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक भी बनेगा। मेले के दौरान श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के लिए विभिन्न सांस्कृतिक एवं पारंपरिक गतिविधियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
कनकेश्वर सेवा समिति एवं ग्रामवासियों ने अंचल सहित प्रदेशभर के शिवभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में कनकी पहुंचकर स्वयंभू कनकेश्वर महादेव के दर्शन करने और इस पावन आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।
हसदेव तट पर स्थित कनकेश्वर महादेव मंदिर आज भी सनातन संस्कृति, अटूट आस्था और विश्वास की अनुपम पहचान बना हुआ है, जहां हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।
