कोरबा की पावन धरा पर आगामी 28 मार्च से 1 अप्रैल तक अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक एवं हनुमान जी के अनन्य भक्त पूज्य संत श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के सान्निध्य में भव्य दिव्य श्री हनुमंत कथा का आयोजन किया जाएगा। इस विराट आध्यात्मिक आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जश्न रिसॉर्ट में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में आयोजन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
बैठक में समाजसेवी राणा मुखर्जी ने भावुक शब्दों में कहा कि इस ऐतिहासिक आयोजन के वास्तविक आयोजक स्वयं श्री बजरंग बली हैं। विशेष बात यह रहेगी कि कथा के प्रथम दिन की प्रथम आरती नगर के सफाई कर्मियों द्वारा की जाएगी, जो सामाजिक समरसता और सेवा-भाव का प्रेरक संदेश देगी।
कथा से पूर्व 27 मार्च को 21 हजार माताओं-बहनों की सहभागिता से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिससे पूरे नगर में भक्ति और उत्साह का वातावरण निर्मित होगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संभागीय सर संघचालक एवं विद्या भारती (मध्य क्षेत्र) के उपाध्यक्ष जुड़ावन सिंह ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि हनुमान जी ने भक्ति, सेवा और समर्पण का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वही समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि श्री हनुमंत कथा का उद्देश्य समाज में समरसता, संगठन और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना है।
समाजसेवी सुबोध सिंह ने इसे जनसहभागिता का महायज्ञ बताते हुए कहा कि यह आयोजन तभी ऐतिहासिक बनेगा जब समाज का हर वर्ग अपनी भूमिका निभाएगा। बैठक में नगर निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन की रूपरेखा के अनुसार अमरजीत सिंह को संयोजक, डॉ. पवन सिंह को सचिव तथा ऋषभ केशरवानी, तपिश, रवि गिडवानी, नवल गुप्ता एवं ऋषभ शुक्ला को कोर टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। “भारत मां की रसोई” के संचालन की जिम्मेदारी समाजसेवी प्रेम मदान ने ली है।
आयोजन का अनुमानित बजट लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपये बताया गया है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए डिजिटल माध्यम सहित विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराने की बात कही है। महिलाओं से संबंधित व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी वैशाली रत्नपारखी ने संभाली है।
बैठक के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि यह दिव्य श्री हनुमंत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समरसता और सनातन चेतना का विराट अभियान बनेगी, जिसमें कोरबा का हर श्रद्धालु सहभागी बनेगा।
कोरबा में सजेगा हनुमंत दरबार, 28 मार्च से धीरेंद्र शास्त्री की दिव्य कथा
