ग्रामीण पर्यटन के बीच आवाज़ आयुर्वेद संगठन की पहल, त्रिदोष से पंचकर्म तक किया गया विस्तृत परिचय
गौरेला विकासखंड के लमना ग्राम स्थित विलेज स्टे में आज एक विशेष आयुर्वेदिक परिचय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां नीदरलैंड से आई विदेशी मेहमान जोहान्ना हेरमीना को भारत की प्राचीन और वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के बारे में विस्तार से बताया गया।
यह पूरा कार्यक्रम आवाज़ आयुर्वेद संगठन के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन के साथ–साथ आयुर्वेद की उपयोगिता, वैज्ञानिकता और जीवनशैली आधारित उपचार पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है।
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने त्रिदोष सिद्धांत—वात, पित्त और कफ, पंचकर्म, आहार-विहार, दिनचर्या और ऋतुचर्या पर विस्तृत जानकारी दी। चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य संरक्षण का विज्ञान है।
इस मौके पर डॉ. सोमेश कुशवाहा, डॉ. संदीप साह, डॉ. विवेक साहू के साथ-साथ
डॉ. दीपा साहू, फार्मासिस्ट पूरन सिंह आयम, औषधालय सेवक अनिल कुमार यदु और पीटीएस संतोष यादव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभी ने विदेशी मेहमान को आयुर्वेद के व्यावहारिक पहलुओं और उपचार विधियों की सरल और वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के तहत विदेशी मेहमान को शासकीय आयुर्वेद औषधालय बगरा का भी भ्रमण कराया गया। यहाँ औषधालय की कार्यप्रणाली, सरकारी आयुर्वेदिक सेवाओं और उपचार प्रक्रियाओं का अवलोकन कराया गया।
इसी दौरान डॉ. दीपा साहू के नेतृत्व में नाड़ी स्वेदन थेरेपी भी कराई गई, जिसमें शरीर शोधन, मांसपेशियों के शिथिलीकरण और दर्द निवारण जैसे लाभों को विस्तार से समझाया गया।
विदेशी मेहमान जोहान्ना हेरमीना ने आयुर्वेद को प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी बताते हुए कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश में इस तरह के कार्यक्रम भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को विश्व मंच पर लाने का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
आवाज़ आयुर्वेद संगठन का यह प्रयास आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार–प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।
