आयुर्वेद की वैश्विक गूंज: गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही में विदेशी अतिथियों ने महसूस की भारतीय चिकित्सा की असली शक्ति

बस्ती-बगरा शासकीय औषधालय में पंचकर्म उपचार से प्रभावित हुए England के मेहमान, जिले को मिली नई अंतरराष्ट्रीय पहचान

गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही/अवास कैवर्त

गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही जिले के लामना ग्राम स्थित Village/Home Stay में ठहरे England से आए विदेशी मेहमानों को शासकीय आयुर्वेद औषधालय, बस्ती-बगरा में पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति से विधिवत परिचित कराया गया। प्राकृतिक परिवेश से घिरे इस जिले में विदेशी अतिथियों का आयुर्वेद की ओर रुझान क्षेत्र के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

औषधालय में आयुष चिकित्सक डॉ. दीपा साहू ने विदेशी मेहमानों को आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों, पंचकर्म चिकित्सा पद्धति, रोग निदान प्रक्रिया एवं विभिन्न आयुर्वेदिक उपचार विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार-विहार और मानसिक शांति का मार्ग भी दर्शाता है। आयुर्वेद की समग्र चिकित्सा प्रणाली शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है, जो रोग के मूल कारण को समाप्त करने पर बल देती है।

इस अवसर पर विदेशी अतिथियों ने नाड़ी स्वेदन (Nadi Swedana) एवं कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। औषधीय भाप द्वारा दी गई नाड़ी स्वेदन प्रक्रिया से शरीर की जकड़न, मांसपेशियों के दर्द एवं थकान में उल्लेखनीय राहत महसूस की गई। वहीं क्यूपिंग थेरेपी के माध्यम से रक्त संचार में सुधार हुआ और शरीर में नई ऊर्जा का संचार हुआ। उपचार के पश्चात मेहमानों ने स्वयं को अधिक आरामदायक, हल्का और ऊर्जावान महसूस किया।

पूरी उपचार प्रक्रिया के दौरान फार्मासिस्ट पूरन सिंह आयम तथा पी.टी.एस. संतोष कुमार यादव का विशेष सहयोग रहा। दोनों ने व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन, थेरेपी की तैयारी एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

विदेशी मेहमानों ने भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली की सराहना करते हुए इसे प्राकृतिक, सुरक्षित एवं प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में उत्पन्न तनाव, थकान और शारीरिक समस्याओं के समाधान में आयुर्वेद एक सशक्त विकल्प सिद्ध हो सकता है। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि वे अपने देश लौटकर इस अनुभव को साझा करेंगे।

स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस प्रकार की पहल से जिले में आयुर्वेद एवं वेलनेस टूरिज्म को नई गति मिलेगी। प्राकृतिक सौंदर्य और पारंपरिक चिकित्सा विरासत से समृद्ध गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही जिला भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। यह आयोजन क्षेत्र की पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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