गाँव से निकलकर GPAT और NIPER तक — पंकज मिन्ज की सफलता की प्रेरक कहानी

सीमित संसाधनों के बीच मेहनत से रचा इतिहास, माता-पिता के आशीर्वाद और संघर्ष से मिली मंज़िल

कोरबा (छत्तीसगढ़) — कहते हैं, “अगर हौसले बुलंद हों तो राहें खुद बन जाती हैं।”ऐसी ही मिसाल पेश की है छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम सर्सदेवा (पोस्ट श्यांग) के रहने वाले पंकज मिन्ज ने।

श्री नॉरिस मिन्ज और श्रीमती गीता मिन्ज के पुत्र पंकज ने अपने छोटे से गाँव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा GPAT और NIPER-JEE जैसी कठिन परीक्षाएँ पास कीं — और अपने क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया।

 

गाँव की चुनौतियाँ बनीं प्रेरणा

पंकज का गाँव पहाड़ों और जंगलों के बीच बसा है।

जहाँ शिक्षा दर 1% से भी कम है, सड़कें टूटी हुई हैं, और बिजली की सुविधा बेहद सीमित है।

बारिश के मौसम में लाइट चली जाए तो ये बताना मुश्किल होता था कि कब आएगी।

लेकिन इन मुश्किल हालातों ने पंकज को तोड़ने के बजाय मज़बूत बनाया।

जहाँ अधिकांश लोग परिस्थितियों से हार मान लेते हैं, वहीं पंकज ने अपने संघर्ष को अपनी ताकत बना लिया।

शिक्षा और शुरुआती कदम

पंकज ने अपनी ग्रेजुएशन पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर) से (2017-2021) के दौरान पूरी की और 74.75% अंक प्राप्त किए।

पढ़ाई के दौरान उन्होंने “Self Medication of Antibiotics” पर एक महत्वपूर्ण Survey-based Project भी किया, जिसने उनके रिसर्च सोच को और प्रोत्साहन दिया।

COVID-19 के बीच GPAT की तैयारी

वर्ष 2020, जब पूरा देश महामारी के कारण बंद था, तब पंकज ने Pharma Sapience की All India Online Batch से अपनी GPAT तैयारी शुरू की।

लाइट कटने और नेटवर्क की समस्या ने पढ़ाई में कई बार बाधा डाली, लेकिन परिवार — विशेष रूप से माता-पिता — ने हर कठिनाई में साथ दिया।

उन्होंने पंकज को कभी हिम्मत हारने नहीं दी, और पंकज ने भी यह साबित कर दिखाया कि “जिनके इरादे सच्चे हों, उनके लिए कोई परिस्थिति बड़ी नहीं होती।”

परिणाम —

✅ GPAT Qualified (2021)

✅ NIPER-JEE Qualified (2021)

NIPER Hyderabad में ऊँची उड़ान

इसके बाद पंकज ने National Institute of Pharmaceutical Education and Research (NIPER), Hyderabad से

M.S. (Pharm) in Regulatory Toxicology (2021–2023) पूरा किया।

इस दौरान उन्होंने एक उल्लेखनीय रिसर्च प्रोजेक्ट किया —

“Exploiting the potential of new Natural molecules as NorA efflux pump inhibitors against Staphylococcus aureus”

उन्होंने BSL-II लैब में कार्य करते हुए

Drug screening for antimicrobial activity,Animal handling और dosing,Blood & Organ collection,Histopathological evaluation जैसे प्रयोगों का अनुभव प्राप्त किया।

Industry Experience

अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद पंकज ने Hetero Drugs Limited, Hyderabad में

Junior Officer (Regulatory Affairs) के रूप में कार्य किया।

यहाँ उन्होंने Taiwan, Singapore और China के लिए

Dossier Preparation,Regulatory Documentation,Batch Manufacturing Record,Clinical Trial Data Management

जैसे ज़िम्मेदार कार्यों को संभाला।

यह अनुभव पंकज के करियर में एक बड़ा कदम साबित हुआ |

Research & Publications

अब तक 2 Review Articles प्रकाशित 

1 Research और 1 Review Article under communication

 

पंकज मिन्ज का संदेश छात्रों के नाम

 

Struggle हर किसी की ज़िंदगी में होता है, पर जो लगातार मेहनत करते हैं, वही मंज़िल तक पहुँचते हैं।

GPAT जैसी परीक्षा एक दौड़ है — अगर एक पल के लिए भी रुके, तो सैकड़ों लोग आपसे आगे निकल जाते हैं।

सफलता के लिए तीन मंत्र याद रखें —

Concept Clear करो, Test Series दो, और Revision करते रहो।बस इतना कर लो, तो कोई भी परीक्षा मुश्किल नहीं रहेगी।”

गौरव का प्रतीक — माता-पिता के सपनों को किया साकार

श्री नॉरिस मिन्ज और श्रीमती गीता मिन्ज के लिए यह क्षण गर्व का है।उन्होंने हमेशा अपने बेटे को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, चाहे गाँव में सुविधाएँ सीमित थीं, लेकिन उनका विश्वास और आशीर्वाद ही पंकज की सबसे बड़ी पूँजी साबित हुआ।

आज पंकज मिन्ज की कहानी न केवल उनके गाँव सर्सदेवा बल्कि पूरे कोरबा जिले और छत्तीसगढ़ राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

निष्कर्ष

जहाँ एक ओर परिस्थितियाँ सीमित थीं, वहीं दूसरी ओर पंकज की मेहनत, माता-पिता का समर्थन और लगन ने यह सिद्ध कर दिया कि —

“रास्ते नहीं बनते, इरादे बनाते हैं।”

पंकज मिन्ज आज उस नई पीढ़ी का चेहरा हैं, जो यह दिखा रही है कि छोटे गाँव से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

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