समस्या से समाधान तक: दिव्यांग बालक को मिला अधिकार और सहारा
जनाधार किया अपडेट, दी व्हीलचेयर
जिला प्रभारी मंत्री एवं राज्य मंत्री, सार्वजनिक निर्माण विभाग, महिला अधिकारिता एवं बाल विकास विभाग तथा बाल अधिकारिता विभाग डॉ. मंजू बाघमार के समक्ष एक दिव्यांग बालक के परिजन अपनी समस्या लेकर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि बालक की दिव्यांगता के कारण उसका पेंशन आवेदन नहीं हो पा रहा है, जिससे परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
रात्रि चौपाल में प्राप्त शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रभारी मंत्री के निर्देशों पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। बुधवार को तहसील कार्यालय में संजय ई-मित्र के माध्यम से बालक का जनआधार अपडेट कराया गया तथा पेंशन आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ करवाई गई। जनाधार में उनके परिवार की आय एवं दिव्यागता अपडेट की
इसके साथ ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त सहायता योजना के अंतर्गत जिला कलेक्टर के कर-कमलों से दिव्यांग बालक को एक व्हीलचेयर भी उपलब्ध करवाई गई, जिससे उसकी दैनिक गतिविधियों में सहूलियत मिल सके और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक डॉ. टी. आर. आमेटा ने बताया कि दिव्यांग बालक की उंगलियां एवं बायोमेट्रिक पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण केवल तर्जनी उंगली का ही बायोमेट्रिक संभव हो पा रहा है। ऐसे में विभाग द्वारा आइरिस अथवा फेस रिकग्निशन के माध्यम से पेंशन आवेदन पूर्ण कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि बालक को उसका वैधानिक हक शीघ्र मिल सके।
