कोण्डागांव, 19 नवंबर 2025। नेशनल हाईवे 30 स्थित मसोरा टोल नाका के पास बीती रात हुए भीषण सड़क हादसे में पाँच लोगों की मौत ने टोल प्लाज़ा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि यदि टोल प्लाज़ा में क्रेन सहित आपातकालीन वाहनों की सुविधा होती, तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। खुद टोल प्रबंधक ने भी इस कमी को स्वीकार किया है।
जानकारी के अनुसार, हाईवे पर खड़ी खराब ट्रक से एक स्कॉर्पियो की जोरदार भिड़ंत हो गई, जिसमें पाँच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह ट्रक टोल परिसर से लगे मार्ग पर ही कई घंटों से खड़ा बताया जा रहा था। मृतकों के परिजन एवं जनप्रतिनिधि—बड़ेडोंगर क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य जयलाल नाग और स्थानीय निवासी विशाल शर्मा ने टोल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सड़क की स्थिति अत्यंत खराब है, गड्ढों से भरी है और टोल पर आपातकालीन राहत वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं।

परिजनों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यदि टोल प्लाज़ा में क्रेन की सुविधा होती, तो खराब ट्रक को तुरंत हटाकर हादसे को रोका जा सकता था। पाँच मासूम ज़िंदगियाँ यूँही नहीं जातीं। उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब टोल प्रबंधन की लापरवाही के कारण लोगों की जान खतरे में आई है।

उधर, टोल प्रबंधक आलोक पांडे ने भी स्वीकार किया कि कई बार एनएचएआई से क्रेन उपलब्ध कराने की मांग की गई है, परंतु अब तक सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि यदि क्रेन मौजूद होती, तो ट्रक को हटाया जा सकता था और संभवतः यह बड़ा हादसा टल जाता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब टोल वसूली नियमित रूप से की जाती है, तो बदले में सुविधाएँ भी मिलनी चाहिए। अब पाँच बेगुनाहों की मौत के बाद टोल प्रबंधन तथा एनएचएआई की जवाबदेही तय करने की मांग ज़ोर पकड़ रही है।
