उत्तर-पूर्व भारत में रेल संपर्क को नई दिशा देने वाली बइरबी–सायरंग रेल परियोजना अब पूरी तरह से संपन्न हो चुकी है। आज़ादी के 78 साल बाद पहली बार मिज़ोरम की राजधानी आइजोल को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ा जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
लगभग 51.38 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन असम के बइरबी स्टेशन से शुरू होकर मिज़ोरम के सायरंग तक पहुँचती है। इसे चार चरणों में पूरा किया गया –
बइरबी–हरतकी (16.72 किमी)
हरतकी–कावनपुई (9.71 किमी)
कावनपुई–मुअलखांग (12.11 किमी)
मुअलखांग–सायरंग (12.84 किमी)
इस परियोजना के तहत 4 नए स्टेशन – हरतकी, कावनपुई, मुअलखांग और सायरंग तैयार किए गए हैं, जिनमें आधुनिक यात्री सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
करीब 8071 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह परियोजना कठिन पहाड़ी इलाकों, घने जंगलों और भारी वर्षा जैसी प्राकृतिक चुनौतियों को पार कर पूरी की गई। निर्माण में –
48 सुरंगें (12,853 मीटर लंबाई),
55 बड़े पुल, 87 छोटे पुल,
5 रोड ओवर ब्रिज और 6 रोड अंडर ब्रिज शामिल हैं।
सबसे खास संरचना पुल संख्या 196 है, जिसकी ऊँचाई 114 मीटर है – जो क़ुतुब मीनार से भी 42 मीटर अधिक है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 नवम्बर 2014 को इसकी आधारशिला रखी थी। अब इसके पूर्ण होने से मिज़ोरम का शेष भारत से संपर्क और अधिक आसान होगा। यह परियोजना व्यापार, उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खोलेगी तथा सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
यह रेल लाइन न केवल उत्तर-पूर्व भारत के सामाजिक–आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी बल्कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को भी साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
