गौरेला–पेंड्रा–मरवाही/प्रयास कैवर्त
जिला पंचायत गौरेला–पेंड्रा–मरवाही में मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी) प्रक्रिया को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश राउटे ने जिला पंचायत सभाकक्ष में तीनों विकासखंडों की विस्तृत समीक्षा बैठक लेते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि ई-केवाईसी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शेष बचे मजदूरों की ई-केवाईसी एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
समीक्षा बैठक में विशेष रूप से उन ग्राम पंचायतों को चिन्हित किया गया, जहाँ मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी प्रगति 80 प्रतिशत से कम पाई गई। ऐसे सभी ग्राम पंचायतों के तकनीकी सहायक, सचिव एवं रोजगार सहायकों को बैठक में उपस्थित होकर अपनी-अपनी पंचायतों की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि ई-केवाईसी मनरेगा योजना के अंतर्गत मजदूरों को समय पर और पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया है। यदि यह कार्य समय-सीमा में पूरा नहीं होता है, तो मजदूरों को भुगतान में परेशानी हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पंचायत स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की होगी।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जिले में वर्तमान में मनरेगा के कुल 1,09,422 सक्रिय श्रमिक पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 98,054 मजदूरों की ई-केवाईसी पूर्ण की जा चुकी है, जबकि 11,368 मजदूरों की ई-केवाईसी अभी शेष है। जिला पंचायत सीईओ ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शेष संख्या कोई बहुत बड़ी नहीं है और यदि सभी अधिकारी-कर्मचारी समन्वय के साथ कार्य करें, तो इसे आसानी से एक सप्ताह में पूरा किया जा सकता है।
उन्होंने एपीओ मनरेगा तथा तीनों विकासखंडों के कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्वयं फील्ड स्तर पर निगरानी करें, पंचायतों का भ्रमण करें और जहां भी तकनीकी या दस्तावेजी समस्या आ रही है, उसका तत्काल समाधान कराएं। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मजदूर ई-केवाईसी से वंचित न रहे।
जिला पंचायत सीईओ ने स्पष्ट किया कि एक सप्ताह की समय-सीमा समाप्त होने के बाद पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। उस बैठक में जिन ग्राम पंचायतों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई जाएगी, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें संबंधित सचिव, तकनीकी सहायक एवं रोजगार सहायक के विरुद्ध कार्रवाई शामिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि कार्य में तेजी और पारदर्शिता लाना है, लेकिन इसके बावजूद यदि लापरवाही सामने आती है, तो कड़े कदम उठाए जाएंगे।
बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि ई-केवाईसी पूरी होने से मनरेगा योजना में फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त होती है और वास्तविक लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिलता है। इससे मजदूरों का विश्वास भी शासन-प्रशासन पर बढ़ता है। जिला पंचायत प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे इसे एक अभियान के रूप में लें और शेष बचे मजदूरों की ई-केवाईसी जल्द से जल्द पूर्ण कर जिले को शत-प्रतिशत उपलब्धि की श्रेणी में लाएं।
अंत में जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि मनरेगा जिले के हजारों गरीब, श्रमिक और जरूरतमंद परिवारों की आजीविका से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। इसलिए इससे संबंधित हर कार्य पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी मजदूर को उसके हक से वंचित न होना पड़े।
