छुरिया : विकासखंड के ग्राम केशोटोला में समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से नवदिवसीय देवी भागवत कथा पंडित श्री राजेन्द्र प्रसाद दुबे जी महाराज के श्रीमुख से संपन्न हो रहा है । ग्रामीणों की निवेदन स्वीकार कर जनपद अध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा पहुंचे कथा पंडाल,उन्होंने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि आज मुझे अत्यंत सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि मैं आप सभी के बीच देवी भागवत कथा के पावन विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहा हूँ। देवी भागवत कथा, हमारे सनातन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें आदि शक्ति माँ दुर्गा की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और उनकी कृपा का सुंदर वर्णन मिलता है। यह कथा हमें बताती है कि इस सृष्टि की रचना, पालन और संहार करने वाली शक्ति कोई और नहीं, बल्कि स्वयं माँ जगदम्बा हैं।
इस कथा में हमें यह सीख मिलती है कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब-तब माँ शक्ति विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की रक्षा करती हैं। चाहे वह माँ दुर्गा का महिषासुर मर्दन हो, या माँ काली का दुष्टों का संहार, हर कथा हमें यह संदेश देती है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है।
देवी भागवत हमें केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि यह हमें जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाती है। यह सिखाती है कि हमें अपने अंदर की नकारात्मक शक्तियों जैसे अहंकार, क्रोध, लोभ का नाश करना चाहिए और प्रेम, दया, और करुणा जैसे गुणों को अपनाना चाहिए।
देवी भागवत कथा हमें यह भी सिखाती है कि नारी शक्ति का सम्मान करना कितना आवश्यक है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। आज के समय में जब समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब देवी भागवत की शिक्षाएं हमें एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। यह हमें सिखाती है कि अगर हम सच्चे मन से माँ की भक्ति करें और उनके बताए मार्ग पर चलें, तो जीवन की हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि देवी भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्मा को शुद्ध करने और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का एक माध्यम है। हम सभी मिलकर माँ भगवती की भक्ति करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ। इस अवसर पर ग्रामीणजन बड़ी संख्या में कथा श्रवणपान कर रहे थे ।
