रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बजरमुड़ा में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी ने पंचायत और जनपद स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। आरोप है कि कई कार्यों में कागजों पर प्रगति दिखाकर भुगतान कर दिए गए, जबकि जमीनी हकीकत की पड़ताल अभी बाकी है।
जियो-टैग और मेजरमेंट बुक से खुल सकता है राज
वित्तीय वर्ष 2024-25 में कराए गए कार्यों की पारदर्शिता को लेकर आवेदक ने भुगतान का आधार बनी मेजरमेंट बुक (MB) के प्रमाणित पन्नों की मांग की है। साथ ही कार्य की शुरुआत, मध्य और पूर्ण अवस्था की जियो-टैग तस्वीरें भी मांगी गई हैं। नियमों के अनुसार विकास कार्यों की तस्वीरें अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) के साथ पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होता है।
सूत्रों के मुताबिक यदि जियो-टैग फोटो और MB के विवरण में अंतर पाया जाता है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत हो सकता है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि कार्य वास्तविक रूप से संपन्न हुए या केवल दस्तावेजों में पूर्ण दर्शाए गए।
मस्टर रोल पर उठे सवाल
मानव श्रम से कराए गए कार्यों के लिए मस्टर रोल की सत्यापित प्रतियां भी मांगी गई हैं। अक्सर शिकायत मिलती रही है कि मशीनों से कार्य कराकर कागजों में श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज कर भुगतान निकाला जाता है। यदि मस्टर रोल और स्थल की तस्वीरों में सामंजस्य नहीं मिला तो मामला गबन की श्रेणी में आ सकता है।
समय पर सूचना न देने पर बढ़ी शंका
बताया जा रहा है कि निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद प्रथम अपील दायर की गई। अपील में यह उल्लेख किया गया है कि रिकॉर्ड अन्य कार्यालय में होने का हवाला देकर सूचना रोकना नियमों के अनुरूप नहीं है। इससे संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
आपराधिक प्रावधानों की चेतावनी
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023) की धाराओं का हवाला देते हुए चेतावनी दी गई है कि यदि तथ्य छिपाए गए या भ्रामक जानकारी दी गई तो इसे केवल विभागीय त्रुटि नहीं माना जाएगा, बल्कि आपराधिक कृत्य के रूप में भी देखा जा सकता है। इससे संबंधित अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों में चर्चा, प्रशासन पर नजर
बजरमुड़ा के ग्रामीणों के बीच चर्चा तेज है कि 15वें वित्त आयोग की राशि का वास्तविक उपयोग हुआ या केवल दस्तावेजों में ही विकास दर्शाया गया। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो यह मामला व्यापक प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
फिलहाल, RTI के जरिए उठे सवालों ने तमनार क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
