आसनसोल–बोकारो मेमू सेवा शुरू, स्टील सिटीज़ को मिली नई रफ्तार

पूर्वी भारत के औद्योगिक नक्शे में आज एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब आसनसोल–बोकारो स्टील सिटी मेमू रेल सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस बहुप्रतीक्षित सेवा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। डिजिटल तकनीक और जमीनी उत्साह के संगम ने इस उद्घाटन को यादगार बना दिया।

यह मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) सेवा वर्षों से सस्ती, सुरक्षित और नियमित यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे हजारों श्रमिकों, विद्यार्थियों और छोटे व्यापारियों के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। अब यात्रियों को महंगे बस सफर या अनियमित ट्रेनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

औद्योगिक गलियारे को मिलेगा नया बल

नई मेमू सेवा पश्चिम बर्धमान, पुरुलिया और बोकारो जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक मजबूत “स्टील कॉरिडोर” का निर्माण करती है। इससे सेल (SAIL) की विभिन्न इकाइयों में कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों और श्रमिकों को दैनिक आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी, जिससे औद्योगिक समन्वय और उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण और शैक्षणिक विकास को गति

इस सेवा का लाभ केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। छोटे-छोटे मध्यवर्ती स्टेशनों पर ठहराव से पुरुलिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों को बड़े औद्योगिक बाजारों से सीधी, किफायती कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही, विद्यार्थी अब राज्य सीमा पार स्थित कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों तक रोजाना यात्रा कर सकेंगे, जिससे हॉस्टल और किराये के मकानों का खर्च कम होगा।

किफायती और भरोसेमंद सफर

कम लागत वाले मासिक सीजन टिकटों के साथ यह मेमू सेवा दैनिक मजदूरों और नियमित यात्रियों के लिए लंबी दूरी की यात्रा को आसान बनाती है। सड़क जाम, ईंधन खर्च और मौसम की मार से मुक्त यह विद्युत रेल सेवा समयपालन और सुरक्षा के लिहाज से भी अधिक भरोसेमंद मानी जा रही है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल

नियमित रेल आवागमन से मध्यवर्ती स्टेशनों पर व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। दुकानों, सेवाओं और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मानसून के दौरान भी निर्बाध संचालन से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।

कुल मिलाकर, आसनसोल–बोकारो मेमू सेवा सिर्फ दो स्टील शहरों को नहीं जोड़ती, बल्कि रोज़गार, शिक्षा और समावेशी विकास के नए रास्ते खोलते हुए पूर्वी भारत के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा और गति देती है।

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