जय सतनाम समिति सतनामी समाज चाकाबुड़ा के तत्वाधान में इस वर्ष भी ग्राम में परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की 269वीं जयंती के अवसर पर दो दिवसीय गुरु पर्व का आयोजन किया जा रहा है इस आयोजन का उद्देश्य बाबा जी के जीवन उनके सामाजिक संदेशों और मानवतावादी विचारों को समाज तक पहुंचाते हुए गांव में भक्ति सद्भभाव और समानता का वातावरण निर्मित करना है
इस गुरु पर्व में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन जी, कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री प्रेमचंद पटेल जी , जिला पंचायत अध्यक्ष पवन कुमार सिंह ,जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुषमा रवि रजक सहित अमरदीप अंचल, राज जायसवाल, उमा देवी, कृष्ण कला, बाकी मोंगरा-थाना प्रभारी,भुवन पाल सिंह,पवन कमरो, जितेंद्र कुमार जोशी, रूप सिंह बिंध्यराज ,नरेंद्र साहू जी, सुरेंद्र राठौर ,पंचम पाटले, कमल साय पाटले , कुंज बिहारी टंडन, संजय शर्मा, रोहित जायसवाल आदि पर मुख्य रूप से उपस्थित हुए
कार्यक्रम विवरण के अंतर्गत दिनांक 18 जनवरी 2026 रविवार दोपहर 12 बजे से बच्चों के द्वारा पंथी नृत्य शाम 7:00 से जैतखाम में विशेष पूजा अर्चना के साथ पालो चढ़ाने का कार्य दूसरे दिन 19 जनवरी 2026 सोमवार शुभ दोपहर 2:00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि कालीन सुर वंदना-शशि रंगीला स्टार नाईट लोकप्रिय गायक मनकी-मुंगेली द्वारा प्रस्तुति किया गया पूजा प्रभारी के रूप में बुधराम पाटले, रामनारायण समिति सदस्य रामप्रसाद अनंत, छतराम,समारू अनंत ,रामाअनंत, जय सतनाम समिति के अध्यक्ष रामकुमार , उपाध्यक्ष लकेश्वर ,सचिव चंद्रशेखर ,मंच संचालक राजेंद्र नंत आदि प्रमुख रूप से आयोजन को भव्य रूप से सफल बनाने के लिए तन मन धन से कार्य किए।
अतिथियों द्वारा उद्वबोधनों में परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की छत्तीसगढ़ की धरती पर जन्में महान समाज सुधारक संत और सतनामी पंथ के प्रवर्तक थे उनके माता-पिता श्री महंगू दास एवं श्रीमती अमरौतीन माता थे ।बाबा जी ने उस समय समाज में व्याप्त छुआछूत जाति-पाति और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई और "मनखे-मनखे एक समान"का अमर संदेश दिया
उन्होंने सत्य, अहिंसा, करुणा और समानता पर आधारित जीवन जीने की शिक्षा दी "जय सतनाम" का उद्घघोष करते हुए उन्होंने मानवता को सर्वोच्च धर्म बताया बाबा जी का जीवन समाज के शोषित वंचितों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा उनके आदर्श आज भी समाज को नैतिकता एकता और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं जय सतनाम समिति द्वारा आयोजित यह गुरु पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक समरसता सांस्कृतिक चेतना और नई पीढ़ी में गुरु घासीदास बाबा जी के विचारों के प्रचार प्रसार का सशक्त माध्यम भी है उन्हें इस पावन आयोजन में गुरु संदेश को आत्मसात करने को कहा गया जो 18 दिसंबर बाबा जी की जयंती से प्रारंभ हुई जो आज तक चल रही है।
