विधायक फूलसिंह राठिया बोले – मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा अंतर्गत ग्राम बरकोन्हा (नोनदरहा) में “मनरेगा बचाओ संग्राम” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़े मुद्दों को उठाना और इसे मजबूत बनाए रखने के लिए जनजागरण करना रहा।
कार्यक्रम में रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह योजना गरीब एवं मजदूर परिवारों के लिए जीवनरेखा का कार्य करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मनरेगा के बजट और कार्यों पर असर पड़ रहा है, जिससे ग्रामीणों को समय पर रोजगार और मजदूरी नहीं मिल पा रही है। विधायक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती आई है और आगे भी करती रहेगी।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कोरबा लोकसभा की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा जैसी योजनाएं गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि योजना के बजट में कटौती की जाती है या भुगतान में देरी होती है, तो इसका सीधा असर गरीब परिवारों की आजीविका पर पड़ता है। सांसद ने केंद्र सरकार से मनरेगा के बजट में वृद्धि करने और मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा ग्रामीण के अध्यक्ष मनोज चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित हैं और मनरेगा ही वह माध्यम है, जिससे मजदूरों को गांव में ही काम मिल पाता है। उन्होंने कहा कि यदि इस योजना को कमजोर किया गया तो ग्रामीण पलायन बढ़ेगा और आर्थिक संकट गहराएगा।
कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि पोषक दास महंत, सूरज महंत, अशोक सिंह, प्रवीण ओगरे, शिवम राय, असरफ खान, इब्राहीम खान, रामभरोस राठिया, अजीज खान, जयकिशन पटेल, बिसाहू पटेल और आत्मा राम मन्नेवार सहित अनेक कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मनरेगा को बचाने और मजबूत करने के लिए व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं रखीं और मजदूरी भुगतान में हो रही देरी, कार्य स्वीकृति में अड़चन तथा रोजगार की सीमित उपलब्धता जैसे मुद्दों को उठाया। अंत में सभी ने मनरेगा की रक्षा और ग्रामीण हितों की सुरक्षा के लिए संगठित संघर्ष करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि मनरेगा गांवों के लिए आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है और इसके संरक्षण के लिए जनता सजग है।
